रायपुर/ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ छात्रों की आवाज उठा रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी मोदी सरकार के डर को दिखता है। मोदी सरकाकर पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रही, ऊपर से विपक्ष के नेताओं, छात्राओं को प्रताड़ित करने पर तुली है। राहुल गांधी देश के युवाओं की आवाज बन गये है। देश के युवाओं को राहुल गांधी से ही उम्मीद दिख रही है। राहुल गांधी संसद से लेकर सड़क तक युवाओं की लड़ाई लड़ रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पेपर लीक का संकट अब एक राष्ट्रीय महामारी का रूप ले चुका है। मोदी की सरकार आने के बाद से देश में अब तक 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं ने 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित किया है, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है। लाखों अभ्यर्थी भारी दबाव के बीच औसतन पांच वर्षों तक प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इस तैयारी में न केवल अभ्यर्थियों, बल्कि उनके परिवारों को भी भारी आर्थिक बोझ और त्याग का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अन्य अवसरों के दरवाजे उनके लिए बंद होते जा रहे है, इसलिए हर साल लगभग 9 करोड़ अभ्यर्थियों को केवल 6 लाख सरकारी नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि नीट देशभर के लाखों बच्चों के न सिर्फ भविष्य उनकी भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय 1 वर्षो तक कठिन मेहनत करके बच्चे नीट की तैयारी करके परीक्षा में सम्मिलित हुये थे। पिछली बार भी नीट के पेपर लीक मामले में मोदी सरकार ने किसी की जवाबदेही तय नहीं की, न ही कोई ठोस कार्यवाही किया था। जब 2024 में नीट का पेपर लीक हुआ था, लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हुई थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार में इसी तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम दिया जाता है, उन्हें बड़े-बड़े पदों पर बैठाया जाता है। कारण साफ है- पेपर लीक के इस गोरखधंधे में भाजपा सरकार खुद ही साझेदार है, जिसका खामियाजा देश के मेहनती छात्रों को चुकाना पड़ रहा है। भाजपा की सरकार में परीक्षा की सुचिता लगातार भंग हो रही है, भाजपा शासित राज्यों में ही पेपर लीक हो रहे हैं, कारण स्पष्ट है पेपर लीक करने वाले शिक्षा माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। भाजपा का फंडा साफ है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम, इसीलिए बेखौफ होकर ऐसे कुकृत्य किए जा रहे हैं। दोबारा परीक्षा कराने की मानसिक और आर्थिक जिम्मेदारी कौन लेगा? बार-बार परीक्षाओं में धांधली से एनटीए की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और विश्वसनीय पर सवाल उठ रहा है, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की खामोशी पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर सरकार के संरक्षण की ओर इशारा करती है।









