जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में शनिवार, 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी करार दिया है। अब दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा।
अदालत ने आरोपियों को कुल 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं में दोषी माना है। इस मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
इन आरोपियों को ठहराया गया दोषी
दोषी करार दिए गए आरोपियों में ज्योति उर्फ प्रमिला कोड़ियम, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम, मुक्का मंडावी, मड़कामी, देवा कवासी, कोसा चैतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल हैं।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी के अनुसार, NIA की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी माना है। उन्होंने बताया कि सजा के लिए अदालत ने 16 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। बचाव पक्ष ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
25 मई 2013 को दहला था झीरम घाटी
झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को उस समय हुई थी, जब कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। काफिले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। झीरम घाटी पहुंचने पर नक्सलियों ने कथित तौर पर रास्ता बाधित कर काफिले को निशाना बनाया और भारी गोलीबारी की।
हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई लोगों की जान गई थी। घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे।
राजनीतिक नेतृत्व पर हुआ था बड़ा हमला
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे गंभीर नक्सली हमलों में गिना जाता है। इस हमले में कांग्रेस के प्रदेश और बस्तर क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया गया था। घटना के बाद इसकी जांच विभिन्न स्तरों पर हुई और मामला NIA की विशेष अदालत तक पहुंचा।
करीब 13 साल बाद अदालत के इस फैसले से मामले में दोष तय हो गया है। अब सभी की निगाहें 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर हैं, जब अदालत दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों की सजा का ऐलान करेगी।










