रायपुर। छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य में वर्तमान में 83.36 लाख राशनकार्डधारी परिवारों के 2.73 करोड़ सदस्यों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। यह राज्य की अनुमानित 2026 की आबादी का करीब 87 प्रतिशत है।
खाद्य विभाग के अनुसार जनवरी 2024 से अब तक करीब 10.44 लाख नए राशनकार्ड जारी किए गए हैं, जबकि 16.93 लाख नए सदस्यों को राशनकार्ड में जोड़ा गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू बनाने के लिए पिछले तीन वर्षों में 445 नई उचित मूल्य दुकानों का आबंटन किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 14,182 शासकीय उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं।
74.89 लाख टन चावल का वितरण
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अंत्योदय, प्राथमिकता, निराश्रित एवं दिव्यांग परिवारों को पात्रता के अनुसार निःशुल्क चावल दिया जा रहा है, जबकि सामान्य श्रेणी के परिवारों को 10 रुपये प्रति किलो की दर से चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक राशनकार्डधारियों को 74.89 लाख टन चावल वितरित किया गया।
इसके अलावा बस्तर संभाग के करीब 7.97 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को आयरन की कमी दूर करने के उद्देश्य से 17 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्रतिमाह दो किलो गुड़ दिया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक 26,723 टन गुड़ का वितरण किया गया।
अनुसूचित क्षेत्रों एवं माड़ा क्षेत्रों के अंत्योदय और प्राथमिकता परिवारों को प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए पांच रुपये प्रति किलो की दर से प्रतिमाह दो किलो चना उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे करीब 31.64 लाख परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इसी अवधि में 1.43 लाख टन चना वितरित किया गया।
आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए 74.46 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को आयोडीनयुक्त नमक का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। जनवरी 2024 से जुलाई 2026 तक 2.69 लाख टन नमक का वितरण हुआ। वहीं अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों को 17 रुपये प्रति किलो की दर से प्रतिमाह एक किलो शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवधि में 1.95 लाख टन शक्कर वितरित की गई।
अब 24 घंटे मिलेगा राशन, शुरू हुए ग्रेन एटीएम
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के पहले तीन अन्नपूर्णा ग्रेन एटीएम रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शुरू किए गए हैं। इनका संचालन 8 अगस्त 2026 से प्रारंभ हुआ।
ग्रेन एटीएम में हितग्राही राशनकार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से अपनी सुविधा के अनुसार 24 घंटे चावल प्राप्त कर सकेंगे। इससे उचित मूल्य दुकानों में लगने वाली कतार से राहत मिलने और राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ ग्रेन एटीएम संचालित करने वाला देश का पांचवां राज्य बन गया है। आगामी वर्षों में इसे प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तार देने की योजना है।
धान खरीदी में रिकॉर्ड, किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल
किसान हित में सरकार ने वर्ष 2023 से धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी है। वहीं किसानों को धान की उपज के लिए कुल 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 2,739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। यह राज्य गठन के बाद सर्वाधिक खरीदी बताई गई है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 2,740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वर्ष 2024-25 में किसानों को समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के तहत कुल 46,289 करोड़ रुपये और 2025-26 में 43,723 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।
सरकार के अनुसार किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए समर्थन मूल्य की राशि खरीदी के 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन उनके बैंक खातों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई।
डिजिटल निगरानी से अवैध धान परिवहन पर शिकंजा
धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 2,740 उपार्जन केंद्रों पर बायोमेट्रिक डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, नमी मापक यंत्र और पारदर्शी टोकन व्यवस्था लागू की गई है। आधार सत्यापन के जरिए फर्जी धान खरीदी पर नियंत्रण किया जा रहा है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 9.73 लाख क्विंटल अवैध धान का परिवहन जब्त किया गया। विभाग के अनुसार इससे शासन को करीब 301.89 करोड़ रुपये की बचत हुई। डिजिटल निगरानी और अन्य सुधारात्मक उपायों से करीब 4,000 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत का दावा भी किया गया है।
2026-27 के लिए किसानों का पंजीयन शुरू
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन 1 जुलाई से शुरू हो चुका है और इसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इस बार पिछले वर्ष पंजीकृत एग्रीस्टैक आईडी वाले किसानों को धान विक्रय के लिए मान्य किया गया है। ऐसे किसानों को अलग से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, हालांकि नई भूमि की खरीदी, बिक्री, नामांतरण या बंटवारे की स्थिति में मैपिंग आवश्यक होगी।
एफआरए पट्टाधारी, डुबान, शासकीय पट्टेदार और अन्य पात्र श्रेणियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर एग्रीस्टैक आईडी प्रदान की जा रही है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खसरा और कंपार्टमेंट स्तर पर वास्तविक फसल क्षेत्र का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा।
भंडारण क्षमता में भी विस्तार
खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण के लिए पिछले तीन वर्षों में 27 जिलों के 55 स्थानों पर 2.94 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों का निर्माण पूरा किया गया है। वहीं आठ जिलों के 13 स्थानों पर 89,088 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माणाधीन हैं।
आगामी दो वर्षों में राज्य भंडार गृह निगम के माध्यम से 2.71 लाख टन क्षमता के नए गोदाम बनाने की योजना है। PEG योजना के तहत भी 3.5 लाख टन क्षमता के नए गोदाम प्रस्तावित हैं।
42 लाख घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य
राज्य में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। CGD पॉलिसी 5 मई 2026 से प्रभावी है। इसके तहत घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पाइपलाइन के जरिए PNG तथा वाहनों के लिए CNG उपलब्ध कराने की योजना है।
रायपुर और मनेंद्रगढ़ के कुछ घरों में PNG की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। अगले छह महीनों में सात और शहरों तक इसका विस्तार प्रस्तावित है। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 42 लाख घरों को PNG सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
नियद नेल्लानार 2.0 से 11.41 लाख परिवार लाभान्वित
नियद नेल्लानार योजना 2.0 के तहत बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, मोहला-मानपुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और गरियाबंद के ग्रामीण क्षेत्रों में 11.41 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को पात्रता के अनुसार खाद्यान्न, चना, शक्कर, नमक और गुड़ उपलब्ध कराया जा रहा है।
उज्ज्वला योजना के तहत 39 लाख महिलाओं को कनेक्शन
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत राज्य में अब तक 39 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 3.0 के तहत छत्तीसगढ़ गैस कनेक्शन वितरण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा पर भी जोर
विधिक माप विज्ञान व्यवस्था में प्रस्तावित सुधारों के जरिए व्यापार सुगमता, पारदर्शिता और अनुपालन को सरल बनाने की पहल की गई है। निर्माताओं, मरम्मतकर्ताओं और विक्रेताओं के लिए लाइसेंस व्यवस्था समाप्त कर ऑनलाइन पंजीयन एवं स्व-घोषणा आधारित प्रक्रिया लागू करने का प्रस्ताव है।
उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए ई-हियरिंग सुविधा भी शुरू की गई है। वर्तमान में 18 जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है। अक्टूबर 2023 से जुलाई 2026 के बीच राज्य उपभोक्ता आयोग को मिली 2,058 शिकायतों में से 1,720 मामलों का निराकरण किया गया, जो करीब 84 प्रतिशत निपटान दर है। इसी अवधि में जिला उपभोक्ता आयोगों ने 10,891 मामलों का निपटारा किया।
इस दौरान उपभोक्ताओं के पक्ष में 16.88 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई, जिसमें से 16.02 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
अगले दो वर्षों में स्मार्ट पीडीएस और नए ग्रेन एटीएम पर जोर
आगामी दो वर्षों के लिए खाद्य विभाग ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक तकनीक आधारित बनाने की योजना तैयार की है। स्मार्ट पीडीएस के माध्यम से राशनकार्ड प्रबंधन, सप्लाई चेन और खाद्यान्न वितरण जैसी प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य है।
दूरस्थ क्षेत्रों की 704 उचित मूल्य दुकानों को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने की भी योजना है। नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या दूर करने के लिए दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा।
इसके साथ ही रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य जिलों में भी ग्रेन एटीएम स्थापित किए जाएंगे। आगामी दो वर्षों में 12 जिलों तक PNG गैस की उपलब्धता बढ़ाने की योजना है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में खाद्य विभाग की आगामी रणनीति राशन वितरण को आसान और पारदर्शी बनाने, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने और उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने के साथ डिजिटल तकनीक के अधिकतम उपयोग पर केंद्रित दिखाई दे रही है।









