Desk News (Newsxpress) : रायपुर । 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी प्रणाली को सरल बनाने, व्यापारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने तथा अनावश्यक नोटिस और कानूनी विवादों को घटाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बदलावों पर चर्चा और निर्णय की जानकारी सामने आई है। इन प्रस्तावों का लाभ विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं तथा सेवा प्रदाताओं को मिल सकता है।इस संबंध में रायपुर के वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट CA चेतन दास तारवानी ने बताया कि जीएसटी व्यवस्था में सुधार का सबसे बड़ा लाभ तभी मिलेगा, जब व्यापारियों को छोटी प्रक्रियागत गलतियों के कारण अनावश्यक आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।उन्होंने बताया कि बैठक से संबंधित प्रमुख प्रस्तावों में निम्न विषय व्यापारियों के लिए विशेष महत्वपूर्ण हैं:
1. छोटे GST नोटिस में राहत: ₹10,000 से कम की कर मांग पर शो-कॉज नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव छोटे व्यापारियों के लिए राहतकारी हो सकता है। इससे छोटी रकम के विवादों में समय और कानूनी खर्च कम होने की संभावना है।
2. सामान्य पेनल्टी में कमी: जीएसटी अधिनियम की धारा 125 के अंतर्गत अधिकतम सामान्य पेनल्टी ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 करने के प्रस्ताव से प्रक्रियागत त्रुटियों के मामलों में व्यापारियों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
3. जीएसटी रिटर्न की लेट फीस में राहत: ₹5 करोड़ तक वार्षिक टर्नओवर वाले पात्र व्यापारियों के लिए निर्धारित अवधि के भीतर विलंब से रिटर्न दाखिल करने पर लेट फीस में राहत का प्रस्ताव है। हालांकि लेट फीस में राहत मिलने का अर्थ ब्याज की देनदारी समाप्त होना नहीं है।
4. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में सुधार: एक्सपायर माल, फ्री सैंपल, कर्मचारियों के बीमा तथा कुछ अन्य खर्चों पर आईटीसी संबंधी प्रतिबंधों में राहत के प्रस्ताव से विशेष रूप से एफएमसीजी, दवा, मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार को लाभ मिल सकता है।
5. जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया सरल होगी: रिफंड प्रक्रिया को तेज और अधिक स्वचालित बनाने तथा पात्र मामलों में 90 प्रतिशत तक प्रोविजनल रिफंड देने के प्रस्ताव से निर्यातकों और निर्माताओं की कार्यशील पूंजी की स्थिति बेहतर हो सकती है।
6. जीएसटी जांच और आपराधिक कार्रवाई: गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों की समीक्षा और आपराधिक अभियोजन की मौद्रिक सीमा बढ़ाने के प्रस्तावों से व्यापारियों को कानूनी राहत मिलने की संभावना है। हालांकि फर्जी बिलिंग, धोखाधड़ी और कर चोरी के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रह सकती है।
7. जीएसटी रजिस्ट्रेशन एवं ई-वे बिल में सुधार: रजिस्ट्रेशन, संशोधन तथा माल परिवहन की जांच प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रस्तावों से व्यापारियों को प्रशासनिक सुविधा मिलने और माल की आवाजाही में अनावश्यक बाधाएं कम होने की उम्मीद है।व्यापारियों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?सीए तारवानी ने व्यापारियों को सलाह दी कि वे जीएसटी काउंसिल की घोषणाओं के आधार पर तुरंत अपनी बिलिंग, टैक्स दरों अथवा आईटीसी क्लेम की प्रक्रिया में बदलाव न करें। काउंसिल की सिफारिशें तभी कानूनी रूप से लागू होती हैं, जब संबंधित अधिनियम, नियम या अधिसूचना में आवश्यक बदलाव प्रभावी हो जाते हैं।उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अपने GSTR-1, GSTR-3B और GSTR-2B का नियमित मिलान करना चाहिए, खरीद-बिक्री के बिल एवं स्टॉक रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने चाहिए तथा जीएसटी विभाग से प्राप्त नोटिसों का निर्धारित समय में जवाब देना चाहिए।विशेष रूप से जिन व्यापारियों के जीएसटी नोटिस, पेनल्टी, आईटीसी विवाद या रिफंड के मामले लंबित हैं, उन्हें प्रस्तावित बदलावों के कानूनी प्रभाव की समीक्षा अपने कर सलाहकार से करवानी चाहिए।सीए चेतन दास तारवानी ने कहा, “जीएसटी व्यवस्था में सरलीकरण और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने की दिशा में उठाए गए कदम व्यापार जगत के लिए सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन व्यापारियों को यह समझना आवश्यक है कि जीएसटी काउंसिल की घोषणा और कानून में उसके लागू होने के बीच अंतर होता है। इसलिए राहत का लाभ लेने के साथ-साथ समय पर रिटर्न दाखिल करना, सही इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और अपने रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना भी उतना ही आवश्यक है।”उन्होंने आगे कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए जीएसटी अनुपालन जितना सरल और पारदर्शी होगा, उतना ही वे अपने व्यवसाय के विस्तार और विकास पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।










