CG Mahasamund news |एलपीजी कैप्सूल से करीब डेढ़ करोड़ रुपये के गैस गबन मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले का मुख्य षड्यंत्रकारी जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव था। उसके साथ गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी ने मिलकर गैस गबन की पूरी साजिश रची।
पुलिस के मुताबिक, सुपुर्दनामा की प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद 23 मार्च को पहली गुप्त बैठक हुई थी। इसी बैठक में जब्त एलपीजी कैप्सूल में मौजूद गैस को निकालकर एक करोड़ रुपये की अवैध उगाही की योजना बनाई गई। 26 मार्च को खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा पहुंचे और छह कैप्सूल में उपलब्ध गैस का आकलन किया। जांच में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन गैस होने का अनुमान लगाया गया, जिसके बाद सौदेबाजी तेज हुई। विभिन्न एजेंसियों से बातचीत के बाद 28 मार्च को ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख रुपये में डील फाइनल की गई। तय हुआ कि 50 लाख रुपये अजय यादव को, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी को दिए जाएंगे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्व निर्धारित योजना के तहत खाद्य अधिकारी ने विभागीय कर्मचारियों को सुपुर्दनामा के कागजात में हस्ताक्षर नहीं करने और कैप्सूल का तत्काल वजन नहीं कराने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि पुलिस कर्मचारियों को भी गुमराह किया गया।
सुपुर्दनामा के बाद एक सप्ताह के भीतर छह कैप्सूल से लगभग 92 टन गैस निकाल ली गई। इसके बाद 6 और 8 अप्रैल को खाली कैप्सूल का वजन कराया गया। पुलिस का कहना है कि वजन पंचनामा में गंभीर कूटरचना की गई। पंचनामा खाद्य अधिकारी के कार्यालय में तैयार किया गया और वास्तविक वजन प्रक्रिया से पहले ही दस्तावेज में गैस की मात्रा दर्ज कर कलेक्टोरेट में जमा करा दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि अजय यादव को उसके हिस्से के 50 लाख रुपये सुपुर्दनामा के अगले ही दिन पहुंचा दिए गए थे। बाकी 30 लाख रुपये नकद भुगतान में देरी होने पर संतोष ठाकुर से मनीष चौधरी के खाते में 30 लाख रुपये गिरवी राशि के रूप में जमा कराए गए, जिन्हें बाद में वापस कर दिया गया।
महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वैज्ञानिक पूछताछ और सूक्ष्म विवेचना के बाद इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि सभी कैप्सूल मैकेनिकल रूप से सुरक्षित थे और करीब 100 टन गैस का प्राकृतिक लीकेज बिना बड़ी विस्फोटक घटनाओं के संभव नहीं था।
पुलिस ने मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नगदी और घरेलू सामान सहित कुल 6 लाख 11 हजार 700 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।पुलिस ने प्रकरण में आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूट रचना और शासकीय संपत्ति की हेराफेरी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।











