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नगर पालिका में खरीदी को लेकर बढ़ा विवाद, अध्यक्ष पति की भूमिका पर उठे सवाल

CG NewsTilda-Nevra। नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा में पार्षद निधि एवं अध्यक्ष निधि से की गई कथित सामग्री खरीदी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नगर में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा नगर पालिका अध्यक्ष के पति की भूमिका को लेकर हो रही है। शिकायतकर्ताओं और कुछ जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नगर पालिका के कई महत्वपूर्ण मामलों में अध्यक्ष पति का प्रभाव देखने को मिलता है, जिसके चलते खरीदी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पार्षद निधि एवं अध्यक्ष निधि से टेबल, कुर्सी तथा अन्य सामग्रियों की खरीदी दर्शाई गई है। आरोप लगाने वालों का दावा है कि कागजों में दर्शाई गई सामग्री और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर हो सकता है। इसी वजह से मामले की भौतिक जांच की मांग की जा रही है। इस पूरे विवाद में गणपति ट्रेडर्स का नाम भी चर्चा में है, क्योंकि कथित खरीदी से जुड़े दस्तावेजों में फर्म का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। हालांकि फर्म की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ पार्षदों से विभिन्न दस्तावेजों एवं प्रस्तावों पर हस्ताक्षर लिए गए, जबकि बाद में उन दस्तावेजों का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया, इसकी जानकारी सभी को नहीं थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन मामले को लेकर नगर की राजनीति गरमा गई है।

विपक्षी जनप्रतिनिधियों और कुछ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है तो नगर पालिका प्रशासन को सामग्री खरीदी से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए। इसमें बिल, वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, वितरण सूची और सामग्री के भौतिक सत्यापन की जानकारी शामिल होनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच उत्पन्न संदेह समाप्त हो सकेगा।

मामले में अध्यक्ष पति को लेकर भी लगातार चर्चाएं हो रही हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि नगर पालिका के कई निर्णयों और कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। वहीं दूसरी ओर, उनके समर्थकों का कहना है कि लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं और बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

नगर के सामाजिक एवं राजनीतिक हलकों में अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोगों का मानना है कि जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने और जांच रिपोर्ट के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

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