रायपुर, छत्तीसगढ़ , भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य का पावन पर्व रक्षाबंधन राजधानी रायपुर के झुग्गी बस्तियों में आत्मीयता के साथ मनाया गया। सामाजिक न्याय कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता भगवानू नायक ने वहां बहनों से राखी बंधवाई और उन्हें हर परिस्थिति में सम्मान, सुरक्षा एवं सहयोग का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने और उपहार देने का पर्व नहीं है, बल्कि यह बहनों के सम्मान, सुरक्षा, अधिकार और उनके सुख-दुःख में साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी का संकल्प लेने का दिन है।
उन्होंने कहा “रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब समाज का प्रत्येक भाई अपनी बहन के सम्मान और सुरक्षा को अपना कर्तव्य समझे। हमें यह संकल्प लेना होगा कि किसी भी बहन के साथ अन्याय, शोषण या भेदभाव होगा तो हम उसके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। झुग्गी बस्तियों में रहने वाली हमारी बहनें समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके अधिकार, सम्मान और बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी हम सभी की है।”
उन्होंने कहा कि आज समाज में भाई-बहन के रिश्ते को केवल पारिवारिक दायरे तक सीमित रखने की आवश्यकता नहीं है। प्रेम, सम्मान, विश्वास और सहयोग की भावना को पूरे समाज तक विस्तारित करना होगा। जब समाज के सक्षम वर्ग के लोग वंचित और जरूरतमंद परिवारों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करेंगे, तभी सामाजिक दूरी कम होगी और सामाजिक समरसता मजबूत होगी।
अधिवक्ता भगवानू नायक ने अंत में कहा “राखी की यह डोर केवल कलाई पर नहीं, बल्कि दिलों में बंधनी चाहिए। यह डोर हमें याद दिलाती है कि बहन का सम्मान और सुरक्षा केवल उसके भाई की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। आइए, इस रक्षाबंधन पर हम एक ऐसे समाज का निर्माण करने का संकल्प लें, जहां हर बहन सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर हो।”










