सुकमा; छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहां एक ग्रामीण की मौत के बाद सरकारी अस्पताल से उसके शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली, जिसके बाद परिजन छह किमी दूर अपने घर तक शव को खाट पर रखकर ले गए। बता दे की नक्सलवाद तो खात्मे ओर है जंगलों में शांति लौट रही है, लेकिन बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत अब भी दयनीय है।“अभी छुट्टी है… एंबुलेंस नहीं मिलेगी।” यह कथित जवाब सुनकर गांव के लोग हतप्रभ रह गए और अंततः शव को खाट पर रखकर गांव की ओर रवाना होना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएमएचओ का फोन भी नहीं उठाया गया, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। स्थानीय लोगों ने इसे स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता बताते हुए कड़ी नाराज़गी जताई है।
आपको बता दे की जिले के जगरगुंडा से एक ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद पूरे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एंबुलेंस उपलब्ध न होने पर मजबूर ग्रामीणों को एक मृतक के शव को खाट पर लेकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति सुधरने के बीच यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि क्या विकास और व्यवस्था वाकई जमीनी स्तर पर पहुंच रही है? नक्सल हिंसा भले कम हो रही हो, लेकिन अस्पतालों की लापरवाही, एंबुलेंस संकट और अधिकारियों की गैर–जवाबदेही जैसी समस्याएँ अभी भी ग्रामीणों को परेशान कर रही हैं।इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा प्रशासन पर साफ झलक रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—घटना की तत्काल जांच हो, दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, एंबुलेंस सेवाओं को 24×7 अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।










