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तेजस्वी किसान मार्ट की पहल: एफपीओ के व्यापार, प्रशिक्षण और बाजार नेटवर्क विस्तार पर संगोष्ठी

Desk News : लखनऊ । तेजस्वी किसान मार्ट की ओर से तेजस्वी संगठन न्यास के अंतर्गत रविवार को आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी में एफपीओ (किसान उत्पादक संगठनों) के व्यावसायिक विकास, प्रशिक्षण, बीज उत्पादन, कृषि आदान वितरण, खाद्य प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार नेटवर्क विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई। महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार सहित विभिन्न क्षेत्रों के FPO प्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने इसमें सहभागिता की। संगोष्ठी का संचालन तेजस्वी किसान मार्ट के संगठन मंत्री हिमांशु चतुर्वेदी ने किया। इसकी अध्यक्षता तेजस्वी संगठन न्यास के संस्थापक एवं तेजस्वी किसान मार्ट के मार्गदर्शक ई. प्रकाश पाण्डेय ने की।गांव-गांव स्टोर फ्रेंचाइजी और जनपद स्तर तक कृषि आदान नेटवर्क की योजनाई. प्रकाश पाण्डेय ने तेजस्वी किसान मार्ट की विस्तार योजना पर चर्चा करते हुए बताया कि गांव-गांव स्टोर फ्रेंचाइजी स्थापित करने, प्रत्येक विकासखंड में वितरक नेटवर्क विकसित करने और प्रत्येक जनपद में उच्च गुणवत्ता वाले बीज, कीटनाशक तथा अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए जनपद स्तरीय वितरण व्यवस्था तैयार करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य एफपीओ और एफपीसी के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देना, उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना तथा किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि एफपीओ के उत्पाद, स्थानीय स्टोर और वितरण नेटवर्क आपस में जुड़कर एक मजबूत कृषि व्यवसाय व्यवस्था विकसित कर सकते हैं। कृषि आदानों का वितरण संबंधित लाइसेंस और लागू नियमों के अनुरूप किया जाएगा।विशेषज्ञों ने साझा किए व्यावसायिक विकास के व्यावहारिक सूत्रसंगोष्ठी में डॉ. हरे कृष्ण मिश्रा, सहायक निदेशक, ब्यूरो, लखनऊ ने एफपीओ के लिए सरकारी योजनाओं, आवश्यक प्रक्रियाओं और व्यावसायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांड निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार छोटे स्तर से शुरुआत कर चरणबद्ध तरीके से व्यवसाय बढ़ाने की बात कही। अनीश कुमार, उप महाप्रबंधक एवं संकाय सदस्य, BIRD, लखनऊ ने एफपीओ के वित्तीय प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, ब्रांड निर्माण और व्यावसायिक संचालन की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बेहतर प्रशासन, सामूहिक प्रयास और निदेशक मंडल एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, एफपीओ को अपनी वास्तविक क्षमता के अनुरूप व्यावसायिक योजना बनानी चाहिए तथा कृषि आदान व्यवसाय से शुरुआत करके संसाधन और अनुभव बढ़ने के साथ प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए।श्री अजय कुमार मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, सोनभद्र ने पशुपालन विभाग की हरे चारे से संबंधित योजनाओं और नीतियों की जानकारी देते हुए हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने, पशुपालन को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने तथा संबंधित योजनाओं का लाभ लेने के लिए विभागीय पात्रता एवं प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करने पर जोर दिया।श्री महेंद्र चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, राष्ट्रीय बीज निगम एनएससी, उत्तर प्रदेश ने एफपीओ के लिए बीज उत्पादन और प्रमाणित बीज उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय बीज निगम से जुड़कर बीज क्षेत्र में व्यावसायिक अवसर तलाशने की दिशा में जानकारी साझा की। शैलेश सिंह, पूर्व उप महाप्रबंधक, कृभको ने बायोचार, जैविक खेती, गोबर से खाद निर्माण, कार्बन क्रेडिट और संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्र जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने इन क्षेत्रों में रुचि रखने वाले एफपीओ को उपलब्ध अवसरों और संभावित सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अखिलेश शुक्ला, महाप्रबंधक, ऑर्गोनेक्स्ट लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड ने कृषि आदानों की गुणवत्ता, प्रमाणित जैव उर्वरकों, जैव कीटनाशकों, रासायनिक कीटनाशकों और बीजों के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने कंपनी के उत्पाद ‘ऑर्गोनेक्स्ट एक सूत्र’ का भी उल्लेख किया। कंपनी के अनुसार, इस उत्पाद का छिड़काव फसलों को जंगली जानवरों, पक्षियों और फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों से 40–60 दिनों तक बचाने में सहायक हो सकता है।श्री भानु प्रताप सिंह, एफपीओ विशेषज्ञ एवं निदेशक, बीएमएस सीबीबीओ भी विशेषज्ञ सहभागिता में शामिल रहे। संगोष्ठी में एफपीओ के संस्थागत सुदृढ़ीकरण, व्यावसायिक प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।एफपीओ के आपसी व्यापार और बाजार संपर्क पर जोरसंगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि एफपीओ केवल कृषि उपज के उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वितरण और विपणन को भी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा बनाएं। एफपीओ-से-एफपीओ व्यापार के माध्यम से एक संगठन के उत्पाद दूसरे संगठन तक और वहां से व्यापक उपभोक्ता बाजार तक पहुंच सकते हैं। कृषि आदान वितरण नेटवर्क और गांव स्तरीय स्टोर इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।तेजस्वी किसान मार्ट की पहल तेजस्वी संगठन न्यास एवं यूनिवर्सल सोनांचल फार्मर एसोसिएशन एफपीओ के सामूहिक प्रयासों से एफपीओ/एफपीसी के संस्थागत विकास, प्रशिक्षण, उत्पाद संवर्धन और बाजार संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्साऑनलाइन संगोष्ठी में अजय कुमार, अमित ठाकुर, बेलरानी महतो, विक्रम प्रधान नेवार, चंदना घोष, दिलीप सिंह राठौर, जशबहादुर छेत्री, किरण बिष्ट, लक्ष्मी प्रसाद, पवन कुमार, प्रकाश कुशवाहा, सोनू पटेल, विनोद तिवारी, रणजीत, विजेंद्र, आनंद मौर्य, आनंद, नीलम, इस्माइल लस्कर और महेश कुमार सहित विभिन्न प्रतिभागियों ने सहभागिता की।प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों एवं संस्थाओं में मनभूमि फार्मर्स प्रोड्यूसर, पिरटांड मिलेट एफपीसीएल, पीएसपी डिजिटल, रेवती प्रोग्रेसिव, कुंभराज एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, ब्रह्म कमल, जेजेएसएस, राष्ट्रीय बीज निगम , लखनऊ तथा अरेराज, बिहार से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। तेजस्वी किसान मार्ट के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य एफपीओ को बेहतर व्यावसायिक योजना, कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, उत्पाद विकास और बाजार संपर्क के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं मजबूत कृषि उद्यम के रूप में विकसित करने के अवसरों पर चर्चा करना रहा। कार्यक्रम का संदेश रहा—“हर किसान बने व्यापारी, गांव से ग्लोबल।”

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