रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चोरी के जेवरात को गिरवी रखकर लोन दिलाने के मामले में एक निजी फाइनेंस कंपनी की महिला कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई है। यह कार्रवाई न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के परसुराम नगर, पुरैना में हुई चोरी की जांच के दौरान सामने आई। पुलिस का कहना है कि महिला कर्मचारी ने बिना किसी वैध प्रक्रिया और दस्तावेजों के चोरी के जेवरात फाइनेंस कंपनी में स्वीकार किए, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि आपराधिक लापरवाही के दायरे में आता है। पुलिस के अनुसार, कुछ दिन पहले परसुराम नगर इलाके में एक घर से सोने-चांदी के गहनों की चोरी हुई थी। पीड़ित की शिकायत पर जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो सबसे पहले एक नाबालिग चोर और उसके साथी आशीष नेताम को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आशीष ने खुलासा किया कि चोरी के गहने तेलीबांधा स्थित एक निजी कार्यालय में गिरवी रखे गए हैं। आरोपियों की निशानदेही पर जब पुलिस टीम निजी कंपनी पहुंची, तो रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि गहने स्वीकार करते समय न तो मालिकाना दस्तावेज लिए गए थे और न ही पहचान से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई थी। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि गहने चोरी के थे, इसके बावजूद उन्हें गिरवी रख लिया गया। इसके बाद पुलिस ने कंपनी में कार्यरत सनोहर जहां (27 वर्ष), निवासी पंडरी, झंडा चौक, रायपुर को हिरासत में लिया।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे और निशानदेही से चोरी के सोने के गहने बरामद कर लिए। पुलिस ने महिला कर्मचारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) के तहत मामला दर्ज किया है। थाना पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल चोरी का ही नहीं, बल्कि वित्तीय संस्थानों में आंतरिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का भी है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद कंपनी प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है। कंपनी सूत्रों के अनुसार, बिना वैध दस्तावेज किसी भी प्रकार का जेवर स्वीकार करना कंपनी की नीति के खिलाफ है और मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी। पुलिस पहले ही इस चोरी प्रकरण में नाबालिग आरोपी और आशीष नेताम से चोरी का अन्य सामान बरामद कर चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि क्या ऐसे मामलों में किसी बड़े गिरवी नेटवर्क की भूमिका रही है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या पूर्व में भी इस तरह के जेवर बिना दस्तावेज स्वीकार किए गए हैं।










