CG News : रायपुर। सनातन परंपरा में ‘प्रथम पूज्य’ विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश का स्थान सर्वोपरि है। किसी भी मांगलिक या वैदिक अनुष्ठान की नींव गजानन के आह्वान के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती। भाद्रपद मास के गणेशोत्सव से लेकर अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व तक, जब समूचा देश ढोल-नगाड़ों, जयकारों और अश्रुपूर्ण नेत्रों के साथ मंगलमूर्ति को विदा कर रहा था, तब राजधानी रायपुर की एक तथाकथित ‘सभ्य और शिक्षित’ VIP कॉलोनी में सनातन आस्था को तार-तार कर देने वाला ऐसा घृणित कृत्य सामने आया है जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को आहत कर दिया है।मामला रायपुर के विशाल नगर स्थित प्रतिष्ठित VIP कॉलोनी ‘ग्रीन पैराडाइज’ का है। जहां क्लास-1 ऑफिसर्स, प्राध्यापक और बड़े उद्योगपतियों की मौजूदगी के बीच प्रथम पूज्य भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ वह सुलूक किया गया, जिसकी कल्पना किसी वैदिक अथवा मानवीय समाज में नहीं की जा सकती।शास्त्र कहते हैं कि भगवान गणेश साक्षात ब्रह्म स्वरूप हैं। उनके विसर्जन के लिए बहते निर्मल नीर अथवा पवित्र जलाशयों का विधान है, ताकि प्रकृति और ईश्वर का तादात्म्य अक्षुण्ण रहे। राजधानी में मूसलाधार बारिश के बावजूद जब शहर भर के भक्त छाते तानकर तीन-चार दिनों तक पवित्र भाव से बाजे-गाजे के साथ बप्पा को विदा कर रहे थे, वहीं ग्रीन पैराडाइज की पूजा कमेटी के चंद स्वयंभू कर्ता-धर्ताओं ने कॉलोनी के रहवासियों को सूचित किए बिना ही प्रतिमा को उस जर्जर टंकी में विसर्जित कर दिया, जिसमें सड़ांध, गंदगी और कचरा भरा था तथा जिसका पानी सीधे नाली में बहता है।इतना ही नहीं, इस अपवित्र और अश्रद्धापूर्ण कृत्य को ढकने के लिए कॉलोनी के आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप में संदेश प्रसारित किया गया कि ‘विसर्जन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।’जैसे ही कॉलोनी के धर्मप्रेमी रहवासियों को इस बात की भनक लगी, आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी। लोगों ने जब कमेटी से सवाल किया कि प्रभु गजानन को गंदी नाली की टंकी में क्यों धकेला गया, तो बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला— “बारिश हो रही थी।” रहवासियों ने सीधा तर्क दिया कि जब शास्त्र और विवेक दोनों कहते हैं कि यदि प्रकृति प्रतिकूल हो, तो अनुष्ठान को एक दिन आगे बढ़ाया जा सकता है, फिर ऐसी जल्दबाजी क्यों? रहवासियों ने मांग रखी कि जिन्होंने यह अक्षम्य कृत्य किया है, वे गणेश जी का प्रायश्चित अनुष्ठान कर भगवान गणेश जी से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें।परंतु माफी मांगने और भूल सुधारने के बजाय कमेटी के जिम्मेदारों ने जो किया, वह सनातन धर्म के इतिहास में काला अध्याय बन गया। आरोप है कि लोगों की नाराजगी और सच्चाई सामने आते देख, साक्ष्य मिटाने की नीयत से कॉलोनी के सुरक्षा गार्ड के जरिए भगवान गणेश की पवित्र प्रतिमा को तुड़वाया, कटवाया और खंडित टुकड़ों को एक लावारिस झोले में भरकर गार्ड के जरिए कहीं दूर अज्ञात स्थान पर बहा दिया गया । शास्त्रों में विग्रह को जानबूझकर खंडित करना महापाप माना गया है, जिसे इस पॉश कॉलोनी में खुलेआम अंजाम दिया गया।सबसे त्रासद और शर्मनाक पहलू यह है कि इस शर्मनाक घटनाक्रम के केंद्र में कोई अनपढ़ या असभ्य लोग नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले तथाकथित प्रबुद्धजन शामिल बताए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे कृत्य में शासकीय सेवक अविनाश चौरसिया, उनकी धर्मपत्नी सपना चौरसिया,भूमिका धर्मेश शाह तथा पूजा कमेटी के शीर्ष पद पर आसीन कॉलेज प्रोफेसर पूनम उर्फ संजू साहू की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है।रहवासियों का सीधा सवाल है कि एक प्राध्यापक, जिसका दायित्व युवा पीढ़ी को संस्कृति और नीतिशास्त्र सिखाना है, और एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी, जो कानून और व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है—वे दोनों प्रभु विघ्नहर्ता के ऐसे घोर अपमान पर मूकदर्शक या सहभागी कैसे बन सकते हैं? वहीं कमेटी के कुछ बुजुर्ग सदस्य अब इस घिनौने अपराध पर यह कहकर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं कि जो हो गया सो हो गया, अब बात पर पानी डालो।सनातन धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि श्रद्धा, शुचिता और समर्पण का जीवन-दर्शन है। जब समाज का ‘अभिजात्य’ वर्ग—जो स्वयं को बुद्धिजीवी, क्लास-वन और प्रभुत्वशाली कहता है—ईश्वर के विग्रह के साथ कचरे जैसा व्यवहार करने लगे, तो आने वाली युवा पीढ़ी संस्कारों की क्या परिभाषा सीखेगी? ग्रीन पैराडाइज के रहवासियों में इस समय गहरा आक्रोश व्याप्त है और वे इस पूरे मामले में सार्वजनिक पश्चाताप, वैदिक अनुष्ठान और जिम्मेदारों पर सख्त सामाजिक व कानूनी जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
रायपुर की VIP कॉलोनी ‘ग्रीन पैराडाइज’ में आस्था शर्मसार: गंदे पानी की टंकी में बप्पा का विसर्जन
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