छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला अस्पताल से सामने आए एक आधिकारिक पत्र ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज में उल्लेख है कि 4 अप्रैल 2022 को जिला कार्यक्रम प्रबंधक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, बिलासपुर से दूरभाष पर हुई चर्चा के आधार पर फोर्स कंपनी के बिना पंजीयन वाले वाहनों की चाबियां कोटा, तखतपुर, बिल्हा और मस्तूरी के वाहन चालकों को मरीज परिवहन के लिए सौंप दी गईं,
लेकिन उनसे संबंधित दस्तावेज जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं हैं। सिविल सर्जन के पत्र में दर्ज यही तथ्य अब पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ले आया है।अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिला कार्यक्रम प्रबंधक इस प्रक्रिया के लिए सक्षम अधिकारी थे और क्या संबंधित वाहनों के दस्तावेज उनके पास उपलब्ध थे। यदि दस्तावेज उनके पास थे तो वाहनों का परिवहन विभाग में पंजीयन क्यों नहीं कराया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सीएमएचओ ने बिना नंबर वाले वाहनों के उपयोग के बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।मामले में वर्तमान सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच बिल्हा में बीएमओ रहते हुए बिना नंबर वाले फोर्स वाहन का उपयोग किया गया और सरकारी कोष से लाखों रुपये ईंधन मद में खर्च किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि वाहन ने लगभग 20 से 25 हजार किलोमीटर की दूरी तय की, जबकि मरीज परिवहन का रिकॉर्ड शून्य बताया गया है।
इसी तरह कोटा ब्लॉक में पदस्थ डॉ. निखलेश गुप्ता पर आरोप है कि अप्रैल 2022 से मई 2025 के बीच वाहन को 48 हजार 156 किलोमीटर चलाकर 5 हजार 454 लीटर डीजल खर्च दर्शाया गया, जबकि मरीज परिवहन केवल 8 मामलों में दर्ज है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज और लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ता इसे बिना नंबर दौड़ती एम्बुलेंस और सरकारी धन के उपयोग से जुड़ा बड़ा मामला बता रहे हैं। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।शेष दो ब्लॉकों से जुड़े दस्तावेज और तथ्यों को लेकर भी जल्द नया खुलासा किया जाएगा।









