रायपुर/ रकार के द्वारा आत्मानंद स्कूलों में बच्चो से सालाना फीस वसूलने के निर्णय का कांग्रेस ने विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने प्रदेश के गरीब एवं ऐसे लोग जो अपने बच्चो को प्राईवेट अंग्रेजी स्कूलो में नहीं पढ़ा सकते उनके लिये अंग्रेजी माध्यम का आत्मानंद स्कूल शुरू किया था, दुर्भाग्यजनक है कि भाजपा सरकार आत्मानंद स्कूलो में भी बच्चो से फीस वसूलने जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश भर में लगभग 750 आत्मानंद स्कूल शुरू किया था। जिसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जाती और प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को आत्मानंद स्कूलों में तबदील कर छत्तीसगढ़ को मुफ्त शिक्षा की ओर ले जाने की कार्य योजना बनाई गयी थी। भाजपा सरकार इस स्कूल में फीस वसूलने का निर्णय लेकर अन्याय कर रही है। मुफ्त शिक्षा स्वास्थ्य हर नागरिक का अधिकार है तथा नागरिको को यह देना सरकार का दायित्व भाजपा सरकार अपने दायित्व को पूरा करवाने मे असफल साबित हो रही है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से आत्मानंद स्कूल को बंद करने का षडयंत्र शुरू कर दिया गया है अभी कुछ सालों में आत्मानंद स्कूलों में स्टेशनरी की कमी, आवश्यक सुविधा को उपलब्ध नही कराया जा रहा है। स्कूलों के शिक्षकों को जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से वेतन नहीं दिया जा रहा ताकि संविदा के आधार नियुक्त शिक्षक धनाभाव में स्कूल छोड़ दें और स्कूलों को बंद करने का बहाना खोजा जा सके। इसकी शुरूआत फीस वसूलने से की जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना गरीबों और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिये संजीवनी है। इस स्कूल में बच्चों को मुफ्त अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कराया जाता है। निजी स्कूलों में एक बच्चे का अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई में औसतन प्रति माह 8 हजार से 9 हजार रू. का खर्च आता है। गरीब और मध्यम वर्ग के लिये यह खर्च उनकी क्षमता से अधिक हो जाता है। स्वामी आत्मानंद स्कूल में गरीब आदमी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दिला पा रहा है और अवसर का फायदा बच्चे भी उठा रहे है, तथा वे सफलता के नये परचम लहराया है। आत्मानंद स्कूलों की उपेक्षा जनता के साथ अन्याय है।










