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61 किलो गांजा तस्करी मामले में बड़ा फैसला, दो आरोपियों को 15-15 साल की सजा

Raipur Crime News : (Newsxpress) । मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक अहम मामले में विशेष न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष दांडिक प्रकरण (एनडीपीएस) क्र. 148/2021, छत्तीसगढ़ राज्य बनाम शादाब खान व अन्य में सुनवाई के बाद अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) रायपुर पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने सुनाया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और आरोपियों के कब्जे से बरामद मादक पदार्थ की मात्रा को देखते हुए सजा में किसी प्रकार की उदारता बरतने का कोई आधार नहीं बनता।

61 किलो गांजा बरामद
अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों के आधिपत्य वाली होंडा इंडिगो कार क्रमांक CG-04/HA-5540 से व्यावसायिक मात्रा में कुल 61 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने यह माना कि आरोपियों के खिलाफ आरोप युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित हो चुके हैं।

इन आरोपियों को हुई सजा
अदालत ने इस मामले में शादाब खान पिता नसीमुद्दीन खान, घनश्याम मेहर पिता मधुसुदन को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (NDPS Act) की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत दोषी पाया। दोनों आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 1,50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को तीन-तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा।

पहले अपराध होने का दिया गया तर्क
सजा सुनाए जाने से पहले आरोपियों के अधिवक्ता ने अदालत में यह तर्क दिया कि यह उनके मुवक्किलों का पहला प्रमाणित अपराध है, इसलिए सजा में उदारता बरती जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने इस तर्क पर विचार करने के बाद कहा कि भले ही अभियोजन पक्ष ने पूर्व अपराध से संबंधित कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया हो, लेकिन व्यावसायिक मात्रा में 61 किलो गांजा बरामद होना एक गंभीर अपराध है। इसी कारण अदालत ने आरोपियों को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देने से भी इनकार कर दिया।

न्यायिक हिरासत का समय सजा में समायोजित
न्यायालय ने आदेश दिया कि जांच और सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। यह लाभ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 428 के प्रावधानों के अनुसार दिया जाएगा। यह फैसला नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे अपराधों में कड़ी सजा जरूरी है।

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