Korba News : (Newsxpress) | SECL कुसमुंडा खदान में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा सामने आया, जब नीलकंठ साकार (JV) कंपनी के दो डंपर वाहन अचानक डंप स्लाइड होने के कारण नीचे जा गिरे। गनीमत रही कि इस घटना में दोनों वाहनों के चालक बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
🚧 डंप स्लाइड से हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खदान में कार्य के दौरान अचानक डंप स्लाइड हुआ, जिससे दोनों भारी वाहन नियंत्रण खो बैठे और नीचे जा गिरे। घटना के बाद खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मौके पर कर्मचारियों की भीड़ जुट गई।
अधिकारियों ने लिया घटनाक्रम का जायजा
घटना की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। प्राथमिक स्तर पर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर कुसमुंडा खदान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं, बावजूद इसके सुरक्षा उपायों में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है।
प्रबंधन और ठेका कंपनियों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि खदान क्षेत्र में कार्यरत SECL प्रबंधन एवं निजी ठेका कंपनियों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे कार्यस्थल पर सभी सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
क्या नियमित रूप से सुरक्षा जांच (Safety Audit) की जा रही है?
क्या मशीनरी और कार्यस्थल की स्थिति का समय-समय पर निरीक्षण होता है?
क्या कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
इन सवालों के जवाब इस घटना के बाद और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल
सिर्फ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों और प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे समय-समय पर खदानों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें। यदि जांच और निगरानी नियमित और सख्त होती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।
कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि
खदान में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
अब जरूरत है कि इस मामले में गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए और खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।










