CG Khabar : अपीलों के निपटान हेतु कानूनी समय-सीमा:
अपील प्रक्रिया में जवाबदेही और तेजी लाने के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में कोई बाध्यकारी सीमा नहीं है, जिससे मामले वर्षों लंबित रहते हैं। प्रस्ताव है कि CIT(A) के लिए 12 महीने और ITAT के लिए 24 महीने की वैधानिक समय-सीमा निर्धारित की जाए।
धारा 115BBE के कठोर प्रावधानों में ढील:
वर्तमान में ‘अस्पष्टीकृत आय’ पर लगने वाले 78% प्रभावी टैक्स को अत्यधिक दंडात्मक माना गया है। सिफारिश है कि स्वैच्छिक घोषणा पर टैक्स दर घटाकर 30-40% की जाए और करदाताओं को इस आय के विरुद्ध वास्तविक व्यावसायिक खर्चों व नुकसान (Loss set-off) को घटाने की अनुमति दी जाए।
संशोधित रिटर्न (Revised Return) की अवधि में विस्तार:
संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव है। इसका मुख्य कारण सिपिसि (CPC) द्वारा प्रोसेसिंग में होने वाली देरी है; अक्सर धारा 143(1) की सूचना (Intimation) दिसंबर के बाद मिलती है, जिससे करदाता के पास अपनी गलतियाँ सुधारने का अवसर नहीं बचता।










