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किसानो मे टोकन काटने को लेकर मचा हाहाकार, पंजीयन और खरीदी दोनों अटके

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान की खरीदी शुरू हो चुकी है, वहीं,किसानों को खरीदी केंद्रों पर लंबी कतारों में लगने से बचने के लिए और किसानों को धान बेचने के लिए राज्य सरकार द्वारा एप्लिकेशन बनाया गया है, तुहर टोकन मोबाइल एप” के माध्यम किसान टोकन बुक कर सकते हैं, लेकिन इसी बिच एक बड़ी खबर सामने आ रही है टोकन काटने को लेकर बता दे की “किसानो मे टोकन काटने को लेकर हाहाकार मचा हुआ है “” कापू, 15 नवम्बर से धान खरीदी की जा रही किन्तु इस वर्ष ऑनलाइन टोकन कट रही है ऑफ़ लाइन,टोकन काटना सरकार बंद कर दी है, जिससे ग्रामीण किसान टोकन कटवाने ऑफ के चक्कर काटने मजबूर है

आपको ये भी बता दे की महज 20, 25 किसान ही धान बेच पा रहे है, ऑनलाइन मे 5,10 मिनट मे धान बेचने की टोकन अपने आप बंद हों जाति है, जबकि टोकन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक लिए जाने नियम निर्धारित है, कम से कम 10 बजे तक टाइम है उतने तक टोकन क्यों नहीं कटती है, जबकि किसान कापू सहकारी समिति मे 1929 पंजीयन है, उप बिक्री केंद्र लिपटी मे, 1247 पंजीयन है, ऐसे मे जो किसान मो नेट ap के बारे पता नहीं वह किसान किसके पास् जाये, छेत्र के किसान मो नेट ap केबारे कोई जानकारी नही है, किसानो ने मिडिया के माध्यम से ऑफ़ लाइन टोकन की तुरन्त व्यवस्था कराने की माँग जनहित मे की है, हजारों किंसानो की इस समस्या से किसी को ध्यान नही तक नहीं जाना विडंबना की बात है, इस वर्ष टोकन रकबाघटने बढ़ने को लेकर परेशान, इधर टोकन को लेकर परेशान आखिर किसान जाये तो किसके पास्, जबकि सरकार की इस महती योजना से सरकार आति जाति है, आम जनता अभी तक,सरकार की योजना की नितिगत कार्य योजना बेहद दुखी करने वाली बात साबित हों रही है,सरकार किसानो की महती योजना की समय,रहते सरली कारण नहीं कर पाती है सरकार को इसकी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है,

जिला की जिम्मेदार अधिकारी विभाग से जूड़े लोगो को सज्ञान लेकर ऑफ़ लाइन टोकन तत्काल शुरु करने की कदम उठाने चाहिए, इस सम्बन्ध मे किसानो की प्रधिनिधि मण्डल मुख्यमंत्री मान विष्णु देव साय जी बगिया जाकर फरियाद करने के बात कीसानो द्वारा कही जा रही है इस जन समस्या के बारे sdm प्रवीण भगत पूछे जाने पर उन्होंने कहा की,, किसान खुद टोकन काट रहे है, कोई परेशानी नहीं, कही गई, “” धर्मजयग्ध अनुभाग आदिवासी बाहुल्य छेत्र है किसान को कोई परेशानी नही है,कहना किसान हित मे उचित नही है जबकि प्रवीण भगत आदिवासी किसान के बेटे है किसानो के प्रति उन्हें संवेदनशील होनी चाहिए इधर रकबा बढ़ाने को लेकर भी किसान रात मे लाइन लग परेशान होते रहे है, अब टोकन के लिये, अभी तक,90 % किसान धान कटाई करवा कर धान बेचने आतुर ऐसे इष्ठीथि मे ऑनलाइन टोकन बहुत कम किसान की टोकन कट रही है टोकन ऑफ़ लाइन नहीं खोला गया तो समय पर धान बेचने से वंचित हों जायेंगे, कापू सहकारी समिति मे सबसे अधिक किसान आदिवासी व अन्य समाज के किसान है,

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