रायपुर/ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार एवं मिलरों के सांठ-गांठ के चलते गरीबों को इस माह चावल देने गोदामों में चावल नहीं है। कस्टम मिलिंग के बाद मिलरों के द्वारा पूरा चावल जमा नहीं कराना सरकार की कमजोरी है। सरकार ने इस माह एकमुश्त दो माह का चावल देने का आदेश जारी किया लेकिन वास्तविकता यह दो माह दूर की बात एक माह का चावल देने लायक स्टॉक सरकारी गोदाम में नहीं है।
राशन दुकान में गुणवत्ताहीन खराब चावल मिलने की शिकायत लगातार हो रही है। बस्तर में 30 हजार टन सड़ा चावल वितरण करने दिया गया। जिसका विरोध हुआ, अकेले रायपुर जिला में 75 राईस मिलर ने 7,500 टन कस्टम मिलिंग का जमा नहीं किया गया। पूरे प्रदेश में यही स्थिति है। सरकार ने चावल जमा नहीं करने वाले राईस मिलर पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की? उन्हें ब्लैक लिस्टेड क्यों नहीं किया गया? उनसे चावल की रिकवरी क्यां नहीं की गई? इससे समझ में आ रहा है दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल काली है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकारी गोदाम में चावल नहीं है, फोर्टिफाइड राइस का टेंडर नहीं हुआ है, फिर गरीबों को दो माह का चावल एकमुश्त देने का आदेश क्यों दिया गया? ये आदेश गरीबों के साथ भद्दा मजाक है, अपमान है। क्या खाद्य संचालनालय के अधिकारी बेसुध रहते है? उन्हें अपने विभाग की स्टॉक के बारे में जानकारी नहीं है? बड़ी अराजक स्थिति है? राशन कार्डधारी पहले ही खराब क्वालिटी की सड़ा हुआ चावल राशन दुकानों से मिलने की शिकायत कर रहे है। जिस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। क्या विभाग, खाद्य मंत्री के बिना जानकारी इस प्रकार से आदेश दिया है? क्या ये आदेश विभागीय मंत्री के अनुमोदन से हुआ है? लाखों टन चावल जिसमें फोर्टिफाइड चावल कैसे मिलेगा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस प्रकार से खाद्य विभाग की कार्यशैली है इस बात का प्रमाण है विभागीय मंत्री के नियंत्रण में कुछ भी नहीं है? खाद्य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए कि खाली गोदाम से गरीबों के घर तक दो माह का चावल कब पहुंचेगा? सरकार के अजीबोगरीब फरमान से खाद्य अधिकारी एवं राशन दुकान संचालक सभी परेशान है। गरीबों को चावल देने के नाम से भाजपा सरकार गुमराह कर रही है। सरकार तत्काल फोर्टिफाइड मिला चावल की व्यवस्था कर, राशन कार्डधारियों को दे।










