रायपुर। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकारी उत्तम जायसवाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा सरकारी हेल्थ सिस्टम खुद बहुत ज्यादा बीमार है,इलाज को मोहताज है और सालों से अपने खुद के इलाज के लिए सरकार से मिन्नतें कर रही हैं गिड़गिड़ा रहा हैं,और सरकार जानबूझ कर स्वस्थ व्यवस्था कों वंटिलेटर तक पहुँचने के बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारी मे जुट गई हैं सरकार तभी तो पुरे प्रदेश मे निजी अस्पतालों की धूम मची हुई है, आप थोड़ा बीमार होइए निश्चित ही आपको बड़े निजी अस्पताल में भेज दिया जाएगा!वाकई प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था वंटिलेटर पर पहुँच गई हैं ।
इसका एक छोटा सा वर्तमान सबूत हैं जिस प्रदेश के 9 जिला अस्पतालों में आईसीयू ,12 में सिटी स्कैन मशीनें नहीं हैं वहाँ अस्पताल के नाम पर जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता हैं उन्होंने आगे कहा पुरे प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव और मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कई सरकारी अस्पतालों में स्थायी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं,आवश्यक दवाएं एवं जीवनरक्षक औषधियों की समय पर आपूर्ति नहीं हो रही है। अस्पतालों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं और साफ-सफाई की व्यवस्था अत्यंत खराब है। आपातकालीन सेवाओं हेतु एम्बुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।जांच हेतु आवश्यक उपकरण जैसे X-ray, ECG, लैब टेस्ट की सुविधाएं अधिकांश जगह नहीं हैं तो उस प्रदेश का मरीज मज़बूरन निजी अस्पताल की ओर रुख करेगा और अगर गरीब होगा तो इलाज के आभाव मे दम तोड़ देगा और यही चाहती हैं साय सरकार इसकी गंभीरता कों समझते हुए मई 2025 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रदेश की राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं पर संज्ञान लिया था। मरीजों को हो रही परेशानी को मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से संज्ञान लिया था लेकिन 5 दिन बाद 2026 मे प्रवेश करने जा रहे हैं लेकिन बीजेपी की साय सरकार के कान मे जूँ तक नहीं रेंगा।
प्रदेश महासचिव (मीडिया, सोशल मीडिया प्रभारी, मुख्य प्रवक्ता) सूरज उपाध्याय ने कहा कि आखिर राज्य गठन के इन 25 सालों बाद भी अगर हमारे प्रदेश को सर्वसुविधायुक्त सरकारी अस्पताल उपलब्ध न हो तो विज्ञापन के बड़े बड़े दावों की पोल खुलती नजर आती है।विकास के चमकदार होर्डिंग सरकार की इमेज चमकाते नहीं बल्कि उसकी इमेज पर कालिख पोतते नजर आती है।आखिर इन पच्चीस सालों में आम आदमी की भोजन के बाद की सबसे बड़ी जरूरत स्वास्थ्य सेवा के मामले में सरकार ने किया ही क्या है? 3000 करोड़ से शुरू हुआ बजट अब लाखों करोड़ों में पहुंच गया है।आखिर इतना बजट जाता कहां है?इतने सालों में एक भी सरकारी अस्पताल को क्यों सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं बनाया जा सका?क्यों एक भी सरकारी अस्पताल निजी अस्पतालों जैसा विश्वास हासिल नहीं कर पाया?क्यों इस प्रदेश के आम आदमी को सस्ती सरकारी स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है?
क्या सरकार राजधानी के सरकारी अस्पताल की मशीन भी ठीक नहीं करवा पा रही है?इमेज चमकाने वाले बड़े बड़े खर्चीले इवेंट की जगह सरकारी अस्पतालों को ही ठीक करा ले,तो आम जनता को निश्चित ही राहत तो मिलेगी! ऐसी बीमार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं वाले राज्य छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सारे अस्पताल अति गंभीर रूप से बीमार हैं? बड़े-बड़े दावे करने वाली यह झूठी सरकार आखिर जनता के स्वास्थ्य से खेलना कब बंद करेगी










