CG Khabar : (Newsxpress) | भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश प्रतिनिधि सभा दिनांक 30 एवं 31 मार्च 2026 को रायपुर में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के सभी जिलों से आए प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस प्रतिनिधि सभा में संगठन के शीर्ष नेतृत्व का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में दिनेश कुलकर्णी (अखिल भारतीय संगठन मंत्री), महेश चौधरी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री) तथा डॉ. विशाल चंद्राकर (अखिल भारतीय उपाध्यक्ष) की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन सभी वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार, किसान हितों की रक्षा तथा आगामी समय में सदस्यता अभियान को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
सभा के मुख्य वक्ता के रूप में सुबोध राठी ने किसानों को संबोधित करते हुए गौ आधारित कृषि प्रणाली पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गौमाता से प्राप्त गोबर, गोमूत्र एवं दूध का उपयोग करके जैविक खाद, कीटनाशक तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं, जो न केवल खेती की लागत को कम करते हैं बल्कि भूमि की उर्वरता को भी बढ़ाते हैं।
बैठक के दौरान गौमाता संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में बताया गया कि गोबर एवं गोमूत्र में पाए जाने वाले पोषक तत्व, सूक्ष्मजीव एवं एंजाइम मिट्टी के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं और यह जैविक खेती का मजबूत आधार बन सकते हैं। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया कि देश में रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
प्रस्ताव में निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:
गोवर्धन योजना लागू कर गौपालकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाए।गौ उत्पादों को उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए। स्थानीय नस्लों (जैसे कोसली गाय) के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रयास किए जाएं।जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु गो आधारित उत्पादों का उपयोग बढ़ाया जाए।
स्कूल शिक्षा में गोवंश आधारित कृषि को शामिल किया जाए
कार्यक्रम के अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि आने वाले समय में गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित किया जाएगा तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।
यह प्रतिनिधि सभा न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, बल्कि किसानों के लिए सतत एवं स्वावलंबी कृषि मॉडल को अपनाने का एक स्पष्ट संदेश भी दे गई।










