मेडिसिन एंड कॉस्मेटिक

रवींद्रनाथ एच.एम फाउंडेशन एवं मानव सेवा समिति के संयुक्त प्रयास से हरिना मंदिर मुक्तेश्वर धाम पोटका में निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारा का आयोजन किया गया

रवींद्रनाथ एच.एम फाउंडेशन एवं मानव सेवा समिति के संयुक्त प्रयास से हरिना मंदिर मुक्तेश्वर धाम पोटका में निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारा का आयोजन किया गया

Potka :- सावन के तीसरे सोमवार के उपलक्ष में रवींद्रनाथ एच.एम फाउंडेशन एवं मानव सेवा समिति के संयुक्त प्रयास से हरिना मंदिर मुक्तेश्वर धाम पोटका में निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारा का आयोजन किया गयाl

निशुल्क चिकित्सा शिविर का लाभ लेते हुए श्रद्धालु

जिसमें हजारों भक्त शामिल हुए एवं निशुल्क चिकित्सा शिविर का लाभ उठाया साथ ही साथ लोगों को दवा भी फ्री में उपलब्ध कराई गई मानव सेवा समिति के द्वारा डॉक्टर जे.के गांगुली और विजय दुबे को स्मृति चिन्ह एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया l

भोग ग्रहण करते श्रद्धालु

कार्यक्रम में मुख्य कार्यवाहक के रूप में आदित्य पाठक एवं राजू गुप्ता का योगदान रहा निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारा कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से श्याम प्रसाद, नकुल चौधरी, रासबिहारी राणा, सोमनाथ, शुभेंदु, जितेंद्र कुमार गुप्ता, रोहित कुमार राय, संजीव सिंह मोना रॉय उत्पल बॉस अशोक गुप्ता बनवारी लाल गुप्ता एवं अन्य सदस्य का सहयोग रहा

रविंद्रनाथ एच. एम फाउंडेशन के द्वारा मानगो स्थित वृद्धाश्रम परिसर मे नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया कई लोग हुए लाभान्वित

रविंद्रनाथ एच. एम फाउंडेशन के द्वारा मानगो स्थित वृद्धाश्रम परिसर मे नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया कई लोग हुए लाभान्वित

जमशेदपुर (सुनील वर्मा की रिपोर्ट) :- रविंद्रनाथ एच. एम फाउंडेशन के द्वारा शनिवार को वृद्धाश्रम डिमना मानगो परिसर मे नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में चिकित्सकों ने लोगों की सेहत जांची और उपचार के लिए दवा उपलब्ध कराई।

समाजसेवा में अग्रणी रविंद्रनाथ एच.एम.फाउंडेशन की टीम और चिकित्सकों ने शिविर में शुगर, ब्लड प्रेशर और मौसमी बीमारियों की जांच कर मरीजों को फ्री में दवाइयां दी गई और अन्य सदस्य के द्वारा फल एवं बिस्कुट का वितरण भी किया गया ।

स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित लोग

चिकित्सकों ने स्वाइन फ्लू और डेंगू जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए गए। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई जिसमें नियमित व्यायाम करने, खानपान में सावधानी बरतने की भी हिदायत दी गई। स्वास्थ्य शिविर कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष आदित्य पाठक, उपाध्यक्ष-विजय दुबे, शिविर प्रभारी-डॉ जे.के.गांगुली, श्याम प्रसाद, रंजीत सिंह, संजीव सिंह, सुभाष, संतोष, प्रशांत, शेखर, दीपक चौहान, मुकेश, रंजीत, राजेश चौबे, विकास सिंह, ए.के.दत्ता, राकेश, समेत कई पदाधिकारियों ने शिविर में सेवाएं दी।

3 मई मंगलवार को मनाया जाएगा विश्व अस्थमा दिवस

3 मई मंगलवार को मनाया जाएगा विश्व अस्थमा दिवस

Delhi :- आज पूरी दुनिया में लोग अस्थमा से प्रभावित हैं लेकिन इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में कुछ ही लोग जानते हैं, इसलिए विश्व अस्थमा दिवस का पालन करना और लोगों को इसके बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। विश्व अस्थमा दिवस ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में अस्थमा जागरूकता में सुधार करना है। यह मई के पहले मंगलवार को होता है। उद्घाटन विश्व अस्थमा दिवस 1998 में आयोजित किया गया था।

2018 की वर्ल्ड अस्थमा रिपोर्ट के अनुसार, अस्थमा दुनिया भर में कुल 339 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है और भारत में लगभग 15-20 मिलियन लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और बड़ी संख्या में आबादी के पास अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच नहीं है।

भारत सरकार ने 2018 में घोषणा की थी कि वह लगभग 100 मिलियन निम्न-आय वाले परिवारों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की योजना बना रही है ताकि वे अच्छी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का खर्च उठा सकें। ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के अनुसार, राजस्थान जैसे राज्यों ने पहले ही सरकारी अस्पतालों के लिए अस्थमा रोगियों को मुफ्त मीटर्ड खुराक, ड्राई पाउडर इनहेलर कैप्सूल, इनहेलर और नेबुलाइज़र प्रदान करना अनिवार्य कर दिया है।


अस्थमा के निम्नलिखित लक्षण :-
– साँसों की कमी
– नियमित खांसी
– व्यायाम के बाद थकान
– छाती में जकड़न
– सोने में परेशानी
– घरघराहट

क्यों होता है अस्थमा :-
– धूम्रपान
– प्रदूषण
– एलर्जी
– मोटापा
– तनाव

अजमाइए यह उपाय :-
– फिटनेस पर काम करें
– प्रदूषण तेज दूर रहे
– धूम्रपान बंद करें
– खुद को टीका लगवाए

अस्थमा के बारे में आम गलतफहमियां :-
– उच्च खुराक वाले स्टेरॉयड से  अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।
– अस्थमा एक बचपन की बीमारी है, एक व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ-साथ वह इससे बाहर निकल सकता है।
– अस्थमा के मरीजों को व्यायाम करने से बचना चाहिए।

अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को क्या करना चाहिए :-

दमा के रोगी को अपनी दवा का ठीक से पालन करना चाहिए और अपने नेब्युलाइज़र और इनहेलर को हमेशा संभाल कर रखना चाहिए। सीडीसी के अनुसार अस्थमा से पीड़ित लोगों को स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए और उन्हें ज्यादा से ज्यादा ताजी हवा लेनी चाहिए।

महंगाई की मार फिर एक बार जनता बेहाल, दवाइयां और कॉस्मेटिक सामान होगा महंगा, 40 फीसदी तक बढ़े प्लास्टिक के दाम

महंगाई की मार फिर एक बार जनता बेहाल, दवाइयां और कॉस्मेटिक सामान होगा महंगा, 40 फीसदी तक बढ़े प्लास्टिक के दाम

New Delhi :- पीवीसी, गत्ते व स्टील के बाद अब प्लास्टिक की कीमतों में भी वृद्धि हो गई है. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इससे मालभाड़ा बढऩे से प्रदेश के सबसे बड़े फार्मा हब बीबीएन के उद्योगों में कच्चा माल महंगा पहुंच रहा है. फार्मा हब में प्लास्टिक की ट्यूब, बोतल, ढक्कन और लेमी ट्यूब का इस्तेमाल होता है, लेकिन प्लास्टिक के दाम बढऩे से यह महंगा आने लगा है. इसका असर दवाइयों और कॉस्मेटिक सामान की कीमतों पर भी पड़ेगा.

40 फ़ीसदी तक हुई बढ़ोतरी, प्लास्टिक का दाना 125 रुपये से बढ़कर हुआ 155

प्लास्टिक की ट्यूब व लेमी ट्यूब में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है. प्लास्टिक का दाना 125 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 155 रुपये हो गया है. डेढ़ रुपये वाली ट्यूब अब दो रुपये में मिल रही है. इसके अलावा ढक्कन, बोतल आदि भी 35 से 40 फीसदी तक महंगे हो गए हैं. इससे अब दवाओं की पैकेजिंग भी महंगी हो गई है, क्योंकि कॉस्मेटिक और एंटीबायोटिक स्किन पर लगने वाली सभी दवाएं और क्रीम इन प्लास्टिक की डिब्बियों में पैक होती है. लिक्विड दवाएं और सिरप भी प्लास्टिक की बोतल में ही भरे जाते हैं. ऐसे में इनके महंगे होने से अब दवाओं पर असर होना तय है. बीबीएन में करीब 350 दवा कंपनियां हैं, जिन पर इसका सीधा असर हो रहा है.

रूस-यूक्रेन युद्ध का पड़ रहा है असर

ईआई के प्रदेशाध्यक्ष चिंरजीव ठाकुर ने बताया कि कच्चे माल पर रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काफी असर पड़ा है. डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार बढ़ोतरी से कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं. पांच से दस रुपये प्रति लीटर डीजल का दाम कुछ ही दिनों में बढऩे से भाड़ा बढ़ गया है. प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित सिंगला ने बताया कि प्लास्टिक दाने के रेट बढऩे से दवा कंपनी में लगने वाले ढक्कन, बोतल व लेमी ट्यूब आदि मंहगे हो गए हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है. संवाद

पहले इन सभी के बढ़े थे दाम

फार्मा उद्योगों में लगने वाले एल्यूमीनियम फॉयल के दाम बढ़े पहले एल्यूमीनियम का दाम 232 रुपये प्रति किलो था जो युद्ध के बाद 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया. पीवीसी 120 से बढ़ कर 190 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. मोना कार्टन 85 से 95 रुपये प्रति किलो हो गया. स्टील के दाम 55 से 62 रुपये प्रति किलो हो गए.