घर में रखा सोना बेचने पर देना होगा इनकम टैक्स, जानिए इसके नियम

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देश में आम आदमी सोने (Gold) में निवेश 4 तरीके से करते है जिसमें फिजिकल गोल्ड (Physical gold), गोल्ड म्यूचुअल फंड (Gold mutual fund) या ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड (Digital gold) और सॉवरेन गोल्ड बांड (Sovereign gold bond) आइए अब जानते है इन तरीको पर निवेश करने पर मिलने वाले लाभ पर किस तरह से टैक्स देनदारी बनती है.

नई दिल्ली. सोना हमेशा से आकर्षक का केंद्र रहा है लोग हमेशा सोना इसी लिए खरीदते रहे है क्योंकि इसे निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता रहा है. इसके साथ ही अधिक लोग छोटी-छोटी बचत करके सोने के गहने खरीदते रहते है. जिससे परिवार पर संकट के दौरान गहनों को बेचकर रकम जुटाई जा सके. लेकिन अब सोना बेचना इतना आसान नहीं रहा. क्योंकि आयकर विभाग के नियम के अनुसार यदि आप सोना बेचते है तो आपको मिलने वाले पैसे पर नियमों के मुताबिक टैक्स भरना होगा. आइए जानते है लोग सोने में किस तरह से निवेश करते है और यदि आपने सोना बेचा तो उस पर कितना टैक्स देना होगा…

सोने में निवेश के 4 तरीके- देश में आम आदमी सोने में निवेश 4 तरीके से करते है जिसमें फिजिकल गोल्ड, गोल्ड म्यूचुअल फंड या ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बांड आइए अब जानते है इन तरीको पर निवेश करने पर मिलने वाले लाभ पर किस तरह से टैक्स देनदारी बनती है.

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फिजिकल गोल्ड में निवेश में लाभ पर टैक्स- सोने में निवेश का सबसे आसान तरीका है ज्वेलरी या सिक्के खरीदना और अधिकांश लोग सोने में इसी तरह से निवेश करते है. यदि इस तरह से किए गए निवेश का बेचते है तो उस पर दो तरीके से टैक्स की देनदारी बनती है. पहली यदि आपने सोना खरीदने की तिथि के 3 साल के भीतर उसे बेचा और इसपर यदि आपको मुनाफा होता है तो इसे शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा. इनकम टैक्स के नियम के अनुसार आपके मुनाफे को आपकी इनकम मानते हुए इस पर टैक्स देना होगा. वहीं दूसरी ओर यदि आप निवेश की तिथि के तीन साल के बाद इसे बेचते है तो इसे लांग टर्म कैपिटल गेन मानते हुए इस पर 20 फीसदी टैक्स की देनदारी बनेगी.
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स, गोल्ड ETF से लाभ पर टैक्स- गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेट फंड (ईटीएफ) आपके कैपिटल को फिजिकल गोल्ड में निवेश करता है और यह गोल्ड की प्राइस के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है. गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की बात करें तो यह गोल्ड ईटीएफ में निवेश करता है. गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है.

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डिजिटल गोल्ड पर टैक्स देनदारी- सोने में निवेश के लिए डिजिटल गोल्ड भी एक जरिया है. कई बैंक, मोबाइल वॉलेट और ब्रोकरेज कंपनियों ने एमएमटीसी-पीएएमपी या सेफगोल्ड के साथ टाइ-अप कर अपने ऐप के जरिए गोल्ड की बिक्री करती हैं. इनसे हुए कैपिटल गेन पर फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स या गोल्ड ईटीएफ की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है.

सॉवरेन गोल्ड बांड्स पर टैक्स देनदारी- ये गवर्नमेंट सिक्योरिटीज होती हैं जिन्हें केंद्रीय बैंक आरबीआई सरकार के बिहाफ पर जारी करता है. इनकी कीमत एक ग्राम गोल्ड के बराबर मापी जाती है. निवेशकों को ऑनलाइन या कैश से इसे खरीदना होता है और उसके बराबर मूल्य का सॉवरेन गोल्ड बांड उन्हें जारी कर दिया जाता है. मेच्योरिटी के समय इसे कैश के रूप में रिडीम किया जाता है. इनकी मेच्योरिटी पीरियड आठ साल की होती है और इस अवधि पर रिडीम होने पर इससे हुए गेन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

हालांकि अगर इससे मेच्योरिटी से पूर्व (निवेश के पांच साल बाद ही एग्जिट ऑप्शन मिल जाता है) इसे रिडीम कराते हैं तो इस पर फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स या गोल्ड ईटीएफ की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है. इसके अलावा 2.5 फीसदी का सालाना ब्याज भी मिलता है जो आपके टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्सेबल होता है. हालांकि टीडीएस नहीं कटता है.

News Article & Images Source: https://hindi.news18.com/

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