नगरोटा मुठभेड़: सुरक्षाबलों को मिली सुरंग, संदेह है आतंकियों ने किया था उपयोग

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सुरक्षाबलों को सर्चिंग के दौरान मिली सुरंग 30-40 मीटर लंबी है. आईजी जामवाल ने बताया ‘ऐसा लगता है कि नगरोटा एनकाउंटर (Nagrota Encounter) में शामिल आतंकवादियों ने इस 30-40 मीटर के सुरंग का इस्तेमाल किया था.’

जम्मू. हाल ही में हुए नगरोटा एनकाउंटर के बाद सुरक्षाबलों (Security Forces) ने सुरंगों का पता लगाने अभियान चला रहे हैं. इसी दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) पुलिस और बीएसएफ के जवानों ने सर्चिंग के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सांबा सेक्टर (Samba Sector) में एक सुरंग (Tunnel) का पता लगा है. जम्मू बीएसएफ के आईजी एनएस जामवाल ने नगरोटा मुठभेड़ में शामिल आतंकियों के इसी सुरंग का इस्तेमाल का शक जताया है. खास बात है कि 19 नवंबर को हुए इस एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया था.

सुरक्षाबलों को सर्चिंग के दौरान मिली सुरंग 30-40 मीटर लंबी है. आईजी जामवाल ने बताया ‘ऐसा लगता है कि नगरोटा एनकाउंटर में शामिल आतंकवादियों ने इस 30-40 मीटर के सुरंग का इस्तेमाल किया था.’ उन्होंने बताया कि यह सुरंग अभी ताजी है. आईजी का कहना है ‘हमें मानना है कि उनके पास एक गाइड था, जो उन्हें हाईवे तक लेकर गया था.’

ये चारों आतंकवादी एक ट्रक में छिपकर कश्मीर आने की फिराक में थे जिसे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक टोल प्लाजा पर रोका गया और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चारों मारे गए. मारे गये आतंकवादियों के पास से हथियार और गोलाबारूद का बड़ा जखीरा पकड़ा गया जिसमें 11 एके राइफल, तीन पिस्तौल, 29 ग्रेनेड तथा छह यूबीजीएल ग्रेनेड थे.



पुलिस के अनुसार ये आतंकवादी केंद्रशासित प्रदेश में 28 नवंबर से आठ चरणों में होने वाले जिला विकास परिषद (DDC Elections) के चुनावों में खलल डालने की बड़ी साजिश को अंजाम देने आए थे. अधिकारियों ने कहा कि मारे गए आतंकवादियों के पास से जब्त सामग्री के आधार पर शक है कि वे सांबा जिले में किसी भूमिगत सुरंग के रास्ते पाकिस्तान से इस ओर घुस आए थे.
उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल शुक्रवार से सुरंग का पता लगाने का अभियान चला रहा है और सांबा जिले के रीगल गांव के पास सुरंग होने का संदेह. अधिकारियों ने बताया कि अभियान जारी है जिसमें सेना और पुलिस भी शामिल हैं.

पठानकोट हमले का कमांडर था शामिल
बीते गुरुवार को हुए नगरोटा एनकाउंटर में जांच जारी है. जांच से मिली जानकारी से पता चला है कि इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल कमांडर कासिम जान शामिल है. कासिम 2016 में हुए पठानकोट एयरबेस अटैक का मुख्य आरोपी है. खास बात है कि जान जैश के आतंकियों के बड़े लॉन्च कमांडर में से एक है और उसके दक्षित कश्मीर में अंडरग्राउंड कर्मियों के साथ कनेक्शन भी हैं.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने बताया कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के हटने और तालिबान के विद्रोह के कारण उसका वैचारिक समर्थक जैश जम्मू-कश्मीर सीमा पर काफी सक्रिय हो गया है.

News Article & Images Source: https://hindi.news18.com/

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