जन्मदिन विशेष: बचपन से ही मेधावी हैं मुलायम सिंह यादव

Uttar Pradesh

इस कॉलेज के मौजूदा प्राचार्य अरूण वर्मा समाजवादी पुरोधा मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के जन्म दिन पर बेहद खुश हैं. उनका कहना है कि कॉलेज परिवार की खुशी कई वजह हैं.

दिनेश शाक्य
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित (Etawah) केके कॉलेज (KK College) को इस बात पर गर्व है कि खेत- खलिहान की राजनीति के जरिये देश की शीर्ष राजनीति में सुमार होने वाले समाजवादी जननायक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने छात्र संध अध्यक्ष के रूप मे अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत यहीं से की थी. इटावा का केके कॉलेज मुलायम सिंह यादव के देश के शीर्ष नेताओं में आने पर बेहद गदगद नजर आ रहा है, क्योंकि मुलायम सिंह यादव की स्तानक स्तर की शिक्षा इसी कॉलेज में हुई है. पहली बार मुलायम सिंह यादव छात्र संध के अध्यक्ष बने थे. इसके बाद से इस कालेज से मुलायम सिंह यादव का गहरा लगाव आज भी कायम है. मुलायम सिंह यादव का खासा लगाव इस कॉलेज से है. इस बात को साबित करने के लिये इस कॉलेज के संचालक मंडल ने मुलायम सिंह की यादो की जुडी हुई तमाम तस्वीरे संकलित करके रखी हुई हैं.

मुलायम सिंह यादव बड़ं होने बाद भी इस कॉलेज से अपना जुड़ाव कतई नहीं भूले हैं. वो यहां होने वाले बड़े तो दूर छोटे से छोटे आयोजनों मे भी हिस्सेदारी करने के लिए एक निमंत्रण पर आते रहे हैं. फिलहाल उम्र के असर के चलते उनका आगमन नहीं हो सका है. इटावा मुख्यालय पर स्थापित केके कॉलेज मुलायम सिंह के स्नातक स्तर की प्रारंभिक शिक्षा का गवाह है. मुलायम सिंह यादव ने स्तानक की शिक्षा इसी कॉलेज मे 1961 मे हासिल की थी. मुलायम सिंह यादव ने इस कॉलेज में अध्ययन के दौरान छात्र संध की स्थापना कराई और वे पहली बार छात्रसंध के अध्यक्ष बन चुने गए. इसके बाद वे यहीं से राजनीतिक जीवन मे कदम रखने में सफल हुये.

हजारी लाल वर्मा से उनका बेहद लगाव हुआ करता हुआ करता था
इस कॉलेज के मौजूदा प्राचार्य अरूण वर्मा समाजवादी पुरोधा मुलायम सिंह यादव के जन्म दिन पर बेहद खुश हैं. उनका कहना है कि कॉलेज परिवार की खुशी कई किस्म की है. कॉलेज परिवार इस बात से खुश है कि उनके कॉलेज का कोई छात्र आज देश की राजनीति में न केवल शीर्ष है बल्कि दूसरे छात्रों के लिये प्रेरणास्त्रोत भी बने हैं. इसलिये कॉलेज परिवार उनके लंबी उम्र की कामना करता है. वहीं, कॉलेज प्रबंध तंत्र के अध्यक्ष विजय शंकर वर्मा का कहना है कि मुलायम सिंह यादव अपने छात्र जीवन मे बेहद ओजस्वी, लोकहित चितंक रहे हैं.  मुलायम बीए प्रथम वर्ष के कॉलेज के प्रथम बैच के छात्र थे. 1961 मे मुलायम सिंह यादव इस कॉलेज मे अध्ययन रत रहे  थे. उनके समय में पढ़े छात्र आईएएस, आईपीएस के अलावा केंद्रीय मंत्री स्तर तक जा पहुचे हैं. कॉलेज के संस्थापक हजारी लाल वर्मा से उनका बेहद लगाव हुआ करता हुआ करता था.



2009 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता, विरोधी दल रह चुके हैं
मुलायम सिंह यादव को छात्र जीवन मे पहलवानी का बेहद शौक था. यहां अध्ययनरत होने के दौरान वे कॉलेज की ओर से आगरा कुश्ती टीम के कप्तान बन कर गये और जीत करके वापस लौटे. मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था. इनके पिता का नाम सुघर सिंह, और माता का नाम मूर्ति देवी था. मुलायम सिंह यादव ने साल 1954 में सिर्फ 15 साल की उम्र में नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर नहर रेट आन्दोलन में भाग लिया और पहली बार जेल गए थे. साल 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए. दोबारा 1974, 77, 85, 89, 91, 93, 1996 और 2004 और 2007 में दस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए. मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991 तक, 1993 से 1995 तक और साल 2003 से 2007 तक तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं. साल 1982 से 1985 तक वो उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य और नेता विरोधी दल रह चुके हैं. साल 1985 से 1987 तक उत्तर प्रदेश विधान सभा में नेता, विरोधी दल रह चुके हैं. दोबारा 14 मई 2007 से 26 मई 2009 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता, विरोधी दल रह चुके हैं.

आपातकाल में वो 19 महीने जेल में रहे
साल 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 में मुलायम लोकसभा के सदस्य चुने गए थे. प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और इन्द्र कुमार गुजराल की सरकारों में उन्होंने 1996 से 1998 तक भारत के रक्षामंत्री का पदभार संभाला था.मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में 4 और 5 नवंबर 1992 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की स्थापना की गई. भारत के राजनीतिक इतिहास की यह एक क्रान्तिकारी घटना थी, जब लगभग डेढ़-दो दशकों से मृतप्राय समाजवादी आन्दोलन को पुनर्जीवित किया गया. समाजवादी पार्टी की स्थापना से पूर्व मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश लोकदल और उत्तर प्रदेश जनता दल के अध्यक्ष रह चुके हैं. आपातकाल में वो 19 महीने जेल में रहे. अक्टूबर 1992 में देवरिया के रामकोला में गन्ना किसानों पर पुलिस फायरिंग के खिलाफ चलाए गए किसान आन्दोलन सहित विभिन्न आन्दोलनों में 9 बार इटावा, वाराणसी और फतेहगढ़ आदि जेलों में रहे .

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