5 साल में देश की तेल रिफाइनिंग क्षमता होगी दोगुनी! PM मोदी ने कहा- काम जारी है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि भारत ने 30 से 35 फीसदी कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) कम करने का लक्ष्य तय किया है. उन्‍होंने कहा कि इस दशक में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के इस्तेमाल को चार गुना बढ़ाने की कोशिश जारी है. साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में स्टार्टअप (Power Sector Startups)को मजबूत करने के लिए लगातार काम हो रहा है.

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गुजरात के गांधीनगर (Gandhinagar) में पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (Pandit Deendayal Petroleum University) के 8वें दीक्षांत समारोह के दौरान सोलर फोटो वोल्टिक पैनल के 45 मेगावाट बिजली उत्पादन की यूनिट और वाटर टेक्नोलॉजी पर एक्सीलेंस सेंटर की आधारशिला रखी. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने 30 से 35 फीसदी कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने कहा कि जब मैंने इसके बारे में दुनिया को बताया तो उन्होंने आश्चर्य जताया. उनमें इस बात को लेकर कौतूहल था कि क्या भारत इस लक्ष्य को हासिल कर सकेगा.

ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार ने बनाया है स्‍पेशल फंड
पीएम मोदी ने कहा कि इस दशक में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को चार गुना बढ़ाने के प्रयास जारी हैं. इसके साथ ही अगले पांच साल में देश की तेल रिफाइनिंग (Oil Refining) क्षमता दोगुनी करने पर काम किया जा रहा है. ऊर्जा क्षेत्र में स्टार्टअप को मजबूत करने के लिए लगातार काम हो रहा है. इसके लिए स्‍पेशल फंड आवंटित किया गया है. अगर आपके पास कोई विचार, उत्पाद, सिद्धांत है और उस पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो यह फंड आपके लिए अच्छा मौका है. यह फंड ऐसे लोगों के लिए सरकार की तरफ से तोहफा है. गैस और तेल क्षेत्र में ही इस दशक में करोड़ों रुपये का निवेश होना है. इसलिए आपके लिए इस क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं.

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पीएम मोदी ने कहा, भारत की आशा युवाओं से है


प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में युवाओं से कहा कि 21वीं सदी में दुनिया की आशाएं और अपेक्षाएं भारत से हैं. भारत की आशा और अपेक्षा आपके साथ जुड़ी हैं. हमें तेज गति से चलकर आगे बढ़ना ही होगा. आज की पीढ़ी को क्लीन स्टेट के साथ आगे बढ़ना होगा. आपको अपने मन में बनी हुई कुछ नहीं हो सकता की लकीर को क्‍लीन करना होगा. उन्‍होंने कहा कि जीवन में कुछ कर दिखाने की इच्‍छा रखने वाले लोग सफल होते हैं. सेंस ऑफ बर्डन में जीने वाले विफल होते हैं. सेंस ऑफ रिस्पांसबिलिटी का भाव व्यक्ति के जीवन में सेंस ऑफ अपार्चुनिटी को भी जन्म देता है.

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